गत नवंबर, अपने परिवारजनों के साथ एक तरह की तीर्थयात्रा के सन्दर्भ में हरिद्वार, ऋषिकेश एवं देहरादून जैसी जगहों पर जाने का अवसर मिला. हालाँकि, इन स्थानों का भ्रमण मैंने पहले भी किया है पर इस बार की यात्रा कई मायनों में पूर्ववर्ती यात्राओं से भिन्न है. पिछली बार कुछ सात साल पहले आना हुआ था. विगत कुछ वर्षों में ना सिर्फ इन जगहों में कुछेक बदलाव आये हैं बल्कि सामाजिक परिवेश को लेकर मेरी सोच-समझ में भी. जहाँ एक ओर आनावाले कुम्भ मेले को लेकर हरिद्वार में जोर-शोर से तैयारियां चल रही थी वहीँ दूसरी तरफ ऋषिकेश में 'गंगा बचाओ अभियान' ने मेरा ध्यान आकर्षित किया. ऋषिकेश में शाम की आरती में अनगिनत विदेशियों की उपस्थिति कई लक्षणों के परिचायक प्रतीत हुए. उनकी भाव-भंगिमा एवं तल्लीनता से ऐसा कतई महसूस नहीं हो रहा था कि वे यहाँ सिर्फ सैर-सपाटे के लिए यहाँ आये हों. क्या बच्चे क्या महिलाएं, अधिकांश विदेशी भारतीय वेश-भूषाएं धारण कर भजन में मग्न -- यह गंगा की महिमा है या भारतीय सभ्यता का गहन आकर्षण जो इन्हें श्रद्धा भाव से भर देता है. एकबारगी तो ऐसा भी लगा कि शायद ये लोग हम भारतीयों से कहीं अधिक हमारी संस्कृति का आदर करते हैं. आरती के बाद, आयोजकों का यह सविनय निवेदन कि हमलोग पूजा के नाम पर अगरबत्ती, दीये एवं अन्य चीजें जो गंगा के लिए नुकसानदेह है, उसमे प्रवाहित ना करें -- काफी प्रेरणादायक लगा. क्योंकि कई बार देखने को मिलता है कि पढ़े-लिखे लोग भी पूजा के नाम पर अपनी पवित्र नदियों को जाने-अनजाने में दूषित करते हैं.
देहरादून से कुछ आगे 'सहस्त्रधारा' नामक एक जगह है. किम्वदंती के अनुसार यह गुरु द्रोणाचार्य की गुफा के ऊपर स्थित है. इसका नाम यहाँ एक ही पहाड से निकल रही कई धाराओं से निकल रहे पानी की वजह से पड़ा है. इस जल को त्वचा-सम्बन्धी रोगों के लिए राम बाण माना जाता है. इसे एक 'पर्यटन स्थल' बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई है -- बच्चों के लिए 'फन वर्ल्ड' तो बड़ों के लिए 'रोप वे' से ऊपर जाकर आसपास के नजारों को देखने की व्यवस्था की गयी है. लेकिन एक चीज़ जो इन सभी जगहों पर देखने को मिली, वह यह कि एक तरफ 'कोक', 'पेप्सी' तथा 'मिनरल वाटर' तो दूसरी तरफ 'लेज' और 'कुरकुरे' जैसे खाने पीने की चीजों से बाजारें भरी पड़ी हैं. बहुत ढूँढने पर कहीं एकाध लस्सी या फिर ताजे फलों के जूस के दुकान देखने को मिल जाएँ. ऐसे में शायद यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि कई बार 'विकल्पों के अभाव' में ना चाहते हुए भी आपको पेप्सी या कोक.........
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